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गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को पहली तिमाही के चौथे से छठे हफà¥à¤¤à¥‡ से ही उलà¥â€à¤Ÿà¥€ की दिकà¥â€à¤•त होने लगती है। इस समय गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में इंपà¥â€à¤²à¤¾à¤‚टेशन पूरा होता है। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ तीन महीने खतà¥â€à¤® होने पर उलà¥â€à¤Ÿà¥€ की शिकायत à¤à¥€ खतà¥â€à¤® हो सकती है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ किसी à¤à¥€ महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत पल होता है। लेकिन गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान महिलाओं को तरह-तरह की सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का सामना करना पड़ता है। इस दौरान महिलाओं को मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग, कबà¥à¤œ और पैरों का दरà¥à¤¦ परेशान करता है। साथ ही बार-बार उलà¥à¤Ÿà¥€ आना à¤à¥€ महिलाओं को परेशान कर सकता है। उलà¥à¤Ÿà¥€ को पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी का सबसे सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ माना जाता है। फीसदी महिलाओं को पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान उलà¥à¤Ÿà¥€ होती है। कंसीव करने के बाद अकसर महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उलà¥à¤Ÿà¥€ कब से शà¥à¤°à¥‚ होगी। या पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उलà¥à¤Ÿà¥€ कब से शà¥à¤°à¥‚ होती है?
पीरियडà¥à¤¸ मिस होना
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ में सूजन आना
थकान लगना
बार-बार पेशाब आना
पैरों में à¤à¤‚ठन
मू़ड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग
वजाइनल डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ
कबà¥à¤œ और
उलà¥à¤Ÿà¥€ आना
अधिकतर महिलाओं को पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान उलà¥à¤Ÿà¥€ जैसा महसूस होता है। लेकिन कà¥à¤› महिलाओं को उलà¥à¤Ÿà¥€ जलà¥à¤¦à¥€, तो कà¥à¤› को थोड़े समय बाद शà¥à¤°à¥‚ हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में महिलाओं के मन में अकसर सवाल रहता है, कि आखिर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उलà¥à¤Ÿà¥€ कब से शà¥à¤°à¥‚ होती है-
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उलà¥à¤Ÿà¥€ कब से शà¥à¤°à¥‚ होती है? (When Does Vomiting Start in Pregnancy)
उलà¥à¤Ÿà¥€ आना पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी का सबसे आम लकà¥à¤·à¤£ माना जाता है। यह समसà¥à¤¯à¤¾ लगà¤à¤— 70 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ किठहà¥à¤ महिलाओं को होती है। आमतौर पर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लगà¤à¤— 6 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से उलà¥à¤Ÿà¥€ शà¥à¤°à¥‚ होता है और हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ या महीनों तक चलता है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस होती है। इस दौरान गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में इंपà¥à¤²à¤¾à¤‚टेशन पूरा होता है। इसके बाद उलà¥à¤Ÿà¥€ की दिकà¥à¤•त à¤à¥€ धीरे-धीरे ठीक होने लगती है। लेकिन अगर किसी महिला को उलà¥à¤Ÿà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ नजर नहीं आ रहे हैं, तो यह à¤à¥€ सामानà¥à¤¯ है। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के 12 से 14 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक उलà¥à¤Ÿà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ खतà¥à¤® हो जाते हैं, लेकिन कà¥à¤› महिलाओं में उलà¥à¤Ÿà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ आखिरी समय तक दिख सकते हैं।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ हो जाते हैं, इसकी वजह से उलà¥à¤Ÿà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
शरीर में à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ बढ़ने की वजह से उलà¥à¤Ÿà¥€ हो सकती है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में अधिक सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ लेने से उलà¥à¤Ÿà¥€ का लकà¥à¤·à¤£ टà¥à¤°à¤¿à¤—र हो सकता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में महिलाओं का पाचन तंतà¥à¤° कमजोर हो जाता है, इसकी वजह से वे किसी à¤à¥€ चीज को आसानी से नहीं पचा पाती है। इससे उलà¥à¤Ÿà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ मानव कोरियोनिक गोनाडोटà¥à¤°à¥‹à¤ªà¤¿à¤¨ (à¤à¤šà¤¸à¥€à¤œà¥€) नामक पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ के कारण हो सकती है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने के घरेलू उपाय
उलà¥à¤Ÿà¥€ को कम करने के लिठआप अदरक का सेवन कर सकते हैं। इस दौरान आप अदरक की चाय पी सकते हैं।
नींबू à¤à¥€ उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने में कारगर हो सकता है। इसके लिठआप à¤à¤• नींबू का टà¥à¤•ड़ा लें, इसका सेवन करें।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ बिलà¥à¤•à¥à¤² न लें। इससे आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को अधिक नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान उलà¥à¤Ÿà¥€ को रोकने के लिठआपको अनहेलà¥à¤¦à¥€ फूडà¥à¤¸ खाने से à¤à¥€ बचना चाहिà¤à¥¤ हमेशा हेलà¥à¤¦à¥€ फूडà¥à¤¸ खाà¤à¤‚, जो आसानी से डायजेसà¥à¤Ÿ हो जाà¤à¥¤
संतरे का जूस पीने से मतली, उलà¥à¤Ÿà¥€ को रोकने में मदद मिल सकती है। इससे आपके शरीर की रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ à¤à¥€ बढ़ेगी।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में हेलà¥à¤¦à¥€ रहने के लिठआपको हर 2-3 घंटे में छोटे-छोटे मील लेने चाहिà¤à¥¤ इससे खाना अचà¥à¤›à¥‡ से डायजेसà¥à¤Ÿ होता है और पाचन शकà¥à¤¤à¤¿ सही रहती है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में खà¥à¤¦ को हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ रखने के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पानी पीती रहें।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बन जाती है, इसलिठइस दौरान à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤• फूड से परहेज करें।
उलà¥à¤Ÿà¥€ रोकने के लिठआप डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर दवाइयां à¤à¥€ ले सकते हैं। ताकि मतली, उलà¥à¤Ÿà¥€ से राहत मिलेगी।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उलà¥à¤Ÿà¥€ आने पर डà¥à¤°à¤¾à¤¯ फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸, छाछ आदि काफी फायदेमंद होते हैं।
तली हà¥à¤ˆ चीजें, मसालेदार à¤à¥‹à¤œà¤¨ से परहेज करें। इससे उलà¥à¤Ÿà¥€ से बचेंगे।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उलà¥à¤Ÿà¥€ होना सामानà¥à¤¯ है। लेकिन कà¥à¤› महिलाओं को उलà¥à¤Ÿà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होती है, à¤à¤¸à¥‡ में घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आपको बहà¥à¤¤ लंबे समय तक उलà¥à¤Ÿà¥€, मतली रहता है तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जरूर कंसलà¥à¤Ÿ करें। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अधिक उलà¥à¤Ÿà¥€ आने से बॉडी डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ हो सकती है, बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कम हो सकता है। साथ ही अपनी डाइट, à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ का पूरा खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखें।
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